एक ऐसी घटना जिसने मानवता को इतना शर्मसार कर दिया की शायद ही कभी हुआ हो एक ऐसी घटना जो आपको किसी पर विश्वास करने से पहले हजार बार सोचने को विवश कर दे एक ऐसी घटना जिसने प्रेम शब्द पर ही कालिक को दिया जी हान सही सुना आपने इस घटना ने प्रेम शब्द के ऊपर कालिक पॉड दिया ये दरअसल घटना दिल्ली की है जहां एक प्रेमी ने अपनी ही प्रेमिका के पहले तो गला दबाकर हत्या कर दी और उसके बाद उसके लाश के 35 टुकड़े कर दिए उन टुकड़ों को पहले तो फ्रिज में रखा और फिर एक-एक जंगल में अलग-अलग जगह पर फेंक दिया उसने सोचा था की उसके इस घिनौना कारनामे का पता किसी को नहीं लगेगा मगर वो कहते हैं ना की अपराधी चाहे कितना भी चला क्यों ना हो अपने पीछे कोई ना कोई सुराग छोड़ ही जाता है और इस घटना में भी यही हुआ हालांकि यह पुरी घटना जिस तरह से घाटी है किसी थ्रिलर मूवी के स्क्रिप्ट से कम नहीं है कहानी की शुरुआत होती है मुंबई से ग्रेजुएशन कंप्लीट करने के बाद श्रद्धा वाकर एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करने लगती है उसी दरमियां डेटिंग साइट हर्बल पर उसकी मुलाकात आफताब अमीन पूनावाला से होती है शुरुआत में दोस्ती और फिर दोस्ती प्यार में बदल जाती है समय बीट जाता है दोनों एक दूसरे के करीब ए जाते हैं इतने करीब की दोनों एक दूसरे के साथ रहने का फैसला कर लेते हैं 2019 में श्रद्धा एक दिन अचानक आफताब को लेकर अपने घर ए गई उसने अपनी मैन से कहा की आफताब के साथ कहीं लिविंग रिलेशनशिप में रहना चाहती है बेटी की यह बात सुनकर उसकी मैन चौंक गई उन्होंने समझते हुए श्रद्धा से कहा की यह अंतर धार्मिक विवाह नहीं हो सकता इस पर श्रद्धा ने कहा की मैं 25 साल की हो गई हूं मुझे अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है मुझे आफताब के साथ रिलेशनशिप में रहना है मैं आज से आपकी बेटी नहीं हूं श्रद्धा जब अपना समान लेकर घर से जाने लगी तब उसके माता पिता ने समझने की पुरी कोशिश की लेकिन वह नहीं मणि आफताब के साथ चली गई बाद में था के दोस्तों ने पिता विकास मदन को बताया की दोनों नया गांव और फिर बसाई महाराष्ट्र में रहे साथ रहने के दौरान कुछ महोबा ही दोनों में झगड़ा शुरू हो गया आफताब श्रद्धा के साथ मारपीट करता था तब वह अपने मैन को भी यह बताती थी लेकिन इसी बीच सदमे से श्रद्धा की मैन का देहांत हो गया मैन के मृत्यु के बाद श्रद्धा ने अपने पिता विकास मैदान से दो बार फोन पर बात की तब उसने उन्हें भी बताया था की आफताब उसके साथ मारपीट करता है यह बात उसने घर आकर भी एक बार बताई थी जिस पर पिता के कहने पर वह घर में ही रहने लगी थी लेकिन बाद में आफताब की मैन के कहने पर वह दोबारा उसके पास चली गई काफी समय बाद विकास मैदान को श्रद्धा के दोस्त शिवानी म्हात्रे और लक्ष्मण नगर ने बताया था की श्रद्धा आफताब के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं आफताब श्रद्धा के साथ मारपीट करता है बात नहीं मानने पर विकास ने बेटी से बात करना बंद कर दिया था 14 सितंबर श्रद्धा के दोस्त लक्ष्मण करके बताया की उसकी बहन का फोन 2 महीने से बंद ए रहा है इस पर विकास मैदान ने 15 सितंबर को लक्ष्मण से फोन पर बात की लक्ष्मण ने उन्हें भी बताया की दो ढाई महीने से श्रद्धा से उसकी बात नहीं हुई है क्योंकि उसका फोन नहीं लग रहा है इस पर उन्होंने मानिकपुर महाराष्ट्र में श्रद्धा की gumsudgi के रिपोर्ट दर्ज कराई पहले तो मानिकपुर पुलिस ने आफताब को बुलाकर पूछता है इसकी उसके बाद आफताब ने बताया की झगड़ा होने पर उसने श्रद्धा को छोड़ दिया था उसके बाद मानिकपुर पुलिस ने विकास को बताया की उन्होंने gumsudgi की रिपोर्ट जांच के लिए दिल्ली भेज दी है क्योंकि श्रद्धा आफताब के साथ छतरपुर में रहती थी इसके बाद विकास ने दिल्ली आकर महरौली पुलिस से मिलकर शिकायत की मगर आफताब दिल्ली पुलिस की गिरता में ए गया है और उसने जो कहानी बताई दिल्ली पुलिस को हैरान कर देने वाली है आफताब ने दिल्ली पुलिस को बताया की नया गांव और बा वीडियो में लाइव इन में रहने के दौरान दोनों अक्सर शादी के लिए झगड़ा करते द श्रद्धा उसे पर शादी का दबाव बनाया करते द लेकिन आफताब उससे शादी नहीं करना चाहता था कई महीने बीट जाने के बाद भी जब आफताब शादी के लिए नहीं माना तो दोनों के बीच झगड़ा बढ़ गए रोज-रोज के झगड़ो से तंग आकर आफताब ने श्रद्धा को रास्ते से हटाने का फैसला किया अप्रैल में उसने हिमाचल घूमने का प्लान बनाया उसने श्रद्धा को कहा की हिमाचल से लौटकर दिल्ली जाएंगे वहीं शादी कर लेंगे वहीं रहेंगे ताकि श्रद्धा के घर वाले परेशान ना कर पाए इस पर श्रद्धा भी मैन गई और निकल पड़े हिमाचल के लिए वहां 3 हफ्ते रहने के बाद 8 मैं को दिल्ली वापस ए गए दिल्ली आकर पहले तो पहाड़गंज के एक होटल में दो दिनों तक रुके उसके बाद जब रुपए कम करने लगे तो साकेत के सादुला जॉब में एक पीजी में चार दिनों तक रुके लेकिन अभी तक श्रद्धा को कुछ पता नहीं था की उसके साथ होने वाला क्या है वह यह समझ रही थी की आफताब शादी करने वाला है हैरत की बात यह है की इतने बड़े अपराध को अंजाम देने वाला आफताब भी अब तक बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रहा था हालांकि यह सामान्य नहीं था श्रद्धा को सोचना चाहिए था की अब तक शादी के नाम पर भड़क जाने वाला आफताब उसे पर इतना प्यार कैसे जताने लगा और अब शादी करने ही द तो दिल्ली आने की क्या जरूरत थी पहले से जब मुंबई में लिविंग में रह रहे द तो वहीं शादी क्यों नहीं करते साकेत में चार दिनों तक पीजी में रहने के बाद आफताब ने एक दोस्त की मदद से छतरपुर में एक मकान किराए पर लिया उसने जानबूझ कर ऐसी जगह मकान लिया जहां पास में जंगल हो ताकि वह श्रद्धा को मार सके उसके टुकड़े कर सके और उन टुकड़ों को जंगल में फेंक सके जरा सोचिए या किस तरह की मानसिकता है इतने क्रूर और vibhatt मानसिकता क्या किसी साधारण आदमी की हो सकती है आप इसे क्या कहेंगे मेरे पास तो कोई शब्द नहीं है तो 15 मैं को दोनों ने छतरपुर में किराए पर मकान लिया मकान का किराया 9000 था तीन दिनों तक सब कुछ सामान्य चला श्रद्धा खुश थी उसे लग रहा था की शादी का समय ए गया 18 मैं को श्रद्धांजलि आफताब से पूछा की शादी कब करोगे बस फिर क्या था दोनों के बीच खूब झगड़ा हुए दोनों पहले जैसे ही लड़ने लगे आफताब ने बताया की उसी रात यानी 18 मैं को रात को जब श्रद्धा सो रही थी उसने उसकी गलत दबाकर हत्या कर दी उसने जानबूझकर सोते समय ये सब किया ताकि वह शोर ना मचा पाए उसने बताया की वारदात के अगले दिन यानी 19 मैं को पास के मार्केट से आई और एक फ्रिज खरीद कर लाया और इससे श्रद्धा के लाश के 35 टुकड़े किए और उसे फ्रिज में रख दिया उसने बताया की उसने होटल में सेफ की ट्रेनिंग ली थी जिससे उसे पता था की अगर किसी बकरे को सबूत लाया जाए और उसे काटकर फ्रिज में रखना है तो कैसे रखें उसने बताया की यही उसने श्रद्धा की लाश के साथ भी किया उसने श्रद्धा की लाश को फिनायल और विषयों से भीगा कर रखा था की बदबू ना आए और रोजाना अपने घर में अगरबत्ती भी जलाया करता था उसने प्लास्टिक के बाग में भरकर एक-एक कर श्रद्धा के लाश को 18 दिनों तक महरौली के जंगलों में फेंकता रहा लाश को पुलिस ने बरामद किया है लेकिन केवल हड्डियां ही बची हैं जिम 10-12 टुकड़े बरामद हुए हैं आफताब ने श्रद्धा को 18 मैं को मारा था और 18 दिनों तक उसके लाश को फेंकता रहा इसके पीछे क्या वजह है क्या यह संयोग ही है इस बारे में अभी तक नहीं पता है जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा हम आपको जरूर बताएंगे लेकिन एक रिक्वेस्ट है की आज राजनीतिक परियों वाले बहुत सारे लोग इसे हिंदू और मुसलमान से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन इसे ऐसे देखना नहीं चाहिए क्योंकि यह श्रद्धा की व्यक्तिगत जो उसकी अपनी इच्छा थी उसकी उसका व्यक्तिगत अपना निर्णय था इसमें हिंदू और मुस्लिम की कोई बात ही नहीं थी।