उत्तराखंड के जोशी मठ में भूमि दर्शन से लगातार स्थिति बिगड़ रही है क्षेत्र के सभी वार्डों को चपेट में ले लिया है अब तक 70 से अधिक परिवारों को उनके घरों से अलग शिफ्ट किया जा चुका है भूत हंसाओ का दायरा भारत तिब्बत सीमा की ओर भी बढ़ाने लगा है जिससे ना सिर्फ जोशी मठ की आम जनता बल्कि बॉर्डर पर सैनिकों का रहना भी मुश्किल हो गया है बिगड़ने हालत को ध्यान में रखते हुए जोशी मठ में एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रो पावर प्लांट का कम भी रोक दिया गया है इसके साथ ही हेलंग बायपास रोड का कम भी रोक दिया गया है जोशी मठ में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है की सरकार ने एनटीपीसी में ताबड़तोड़ कंस्ट्रक्शन को लेकर उनकी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया नमस्कार आप देख रहे हैं डेमोक्रेटिक ओपिनियन मैं हूं आपके साथ मनीष कुमार कौन कहता है की सरकार कम नहीं करती जरूरत है देखने और समझने की
[संगीत]
हेमकुंड साहिब ओली फूलों की घाटी जैसे स्थान पर जाने के लिए यात्रियों को इसी जोशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है लेकिन सैलानियों को रह दिखाने वाला जोशी मठ आज खुद किसी की रह देख रहा है की कोई आए और उसके अस्तित्व को बचा ले यहां की जमीन हंसने लगी है सड़कों और घरों में दरारें आने लगी है जो रोजाना बढ़ती ही जा रही है और यहां रहने वाले सैकड़ो परिवारों को बेघर होना पद रहा है पिछले सोमवार की रात मकान में जब अचानक बड़ी दरारे ए गई तो पूरे नगर में भाई फैल गया यह दरारे हर दिन बढ़ रही हैं मारवाड़ी वार्ड में स्थित जेपी कंपनी की आवासीय कॉलोनी के कई मकान में दरारें ए गई कॉलोनी के पीछे पहाड़ी से रात को ही अचानक मत मिले पानी का रिसाव भी शुरू हो गया दरार आने से कॉलोनी का एक पुस्तक [संगीत]
दूध हंसाओ से ज्योतिश्वर मंदिर और मंदिर परिसर में भी दरारे ए गई सीधा हर वार्ड में बहुमंजिला होटल माउंट व्यू और मल्हारी इन जमीन हंसने से तिरछे हो गए हैं स्थानीय लोगों के मुताबिक विचले सोमवार के रात करीब 10:00 होटल की दीवारों से चटकाने की आवाज़ शुरू हो गई जिससे इन होटल के पीछे रहने वाले परिवार के लोग दहशत में ए गए लेकिन इतनी bhayavathi बनी कैसे अचानक से इन सब का इतना बढ़ाव हो गया इन घरों और सड़कों का अचानक दरकना क्या प्राकृतिक कर्म से संभव है भुद हसाओ की एक घटनाएं अचानक नहीं हो रही जोशीमठ एक लंबे [संगीत] स्थानीय लोगों की जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रही है लेकिन कोई सनी नहीं हुई 2006 में वरिष्ठ भूस्खलन वैज्ञानिक चौधरी ने जोशीमठ का अध्ययन किया था उन्होंने इस संबंध में रिपोर्ट शासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सौंप थी लेकिन उसे रिपोर्ट का क्या हुआ इस संबंध में उन्हें भी जानकारी नहीं है जोशी मठ में बुध हंसाओ का कारण beitartiv निर्माण पानी का रिसाव ऊपरी मिट्टी का घटाव और मानव जनित कर्म से जल्द धाराओं के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट को बताया जा रहा है भूस्खलन वैज्ञानिक डॉक्टर स्पैन मिटा चौधरी कहते हैं की पिछले 2 दशकों से जोशीमठ का अनियंत्रित विकास हुआ है बारिश और पूरे साल घरों से निकलने वाला पानी नदियों में जाने के बजाय जमीन के भीतर समा रहा है यह बहुत हंसाओ का प्रमुख कारण है धौली गंगा और अलकनंदा नदियां विष्णु प्रयाग क्षेत्र में लगातार दो कटिंग कर रहे हैं इस वजह तेजी से बढ़ा है चौधरी कहते हैं की 2013 में आई केदारनाथ आपदा 2021 की रानी आपदा बद्रीनाथ क्षेत्र के स्वर में बदल फटने की घटनाएं काफी हद तक जिम्मेदार हैं जोशीमठ में भले ही आज बहुत हंसाओ की घटनाएं सामने आई हो लेकिन इसकी चेतावनी 50 साल पहले दे दी गई थी दरअसल जोशीमठ पहाड़ों के सदियों पुराने मलबे पर बेस हैं यह शुरू से ही दरक रहा है उत्तराखंड जब अप का हिस्सा था तब इसकी जांच के लिए पहली बार 1976 में गढ़वाल के आयुक्त रहे एसपी मिश्रा के अध्यक्षता में एक 18 सदस्य समिति गठित की गई थी मिश्रा समिति ने अपने रिपोर्ट में पुष्टि की थी की जोशी मठ धीरे-धीरे हंस रहा है मिश्रा समिति ने भूस्खलन और भूत हंसाओ वाले क्षेत्र को ठीक कर कर वहां पौधे लगाने की सलाह दी थी इसके साथ ही समिति ने कहा था की स्थल की स्थिरता को जांच करने के बाद ही क्षेत्र में आगे का निर्माण कार्य किया जाना चाहिए और dhalanon पर उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए खुदाई या विस्फोट से बॉर्डर नहीं हटाया जाना चाहिए
कोई पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए विशेष रूप से मारवाड़ी और जोशीमठ के बीच के क्षेत्र में व्यापक वृक्षारोपण कार्य शुरू किया जाना चाहिए और dhalalon पर जो दरारे विकसित हुई हैं उन्हें सील कर दिया जाना चाहिए लेकिन तब से अब तक किसी सरकार ने इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया निर्माण कार्यों में बढ़ोतरी होती गई और जरा भी सावधानी नहीं बढ़ती गई जोशी मठ बचाव संघर्ष समिति के संयोजक अतुल शक्ति ने सवाल किया है की सरकार ने अब कंस्ट्रक्शन का कम क्यों रोक दिया जब हम जमीन में सामान्य के कगार पर हैं अतुल शक्ति ने दवा किया है की तपोवन विष्णुगढ़ परियोजना के लिए बनाए गए सुरंग ने जमीन को खोखला कर दिया स्थानीय लोगों के अनुरोध पर भूगर्भ शास्त्री एसपी सती ने अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री से जुड़े नवीन जायल शर्मा के साथ मिलकर darakti जमीन का अध्ययन किया था सती बताते हैं की 2013 में चींटी गई थी की हाइड्रो सिल्वर परियोजना से जुड़े सुरंग उत्तराखंड में तबाही ला सकते हैं उसे साल इस परियोजना को रोक दिया गया था मगर बाद में इसे फिर से शुरू कर दिया गया यही नहीं साल 2021 के 7 फरवरी को चमोली में आए आपदा के बाद से पूरे नीति वाली में जमीन रखने की खबरें ए रही थी मगर सरकार ने इस पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जून 2022 में गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में जो सिमट शहर की भू वैज्ञानिक नींव के स्थिरता को लेकर चौंकाने वाले कुलसी किए द अध्ययन में कहा गया था की अगर शहरीकरण चार धाम ऑल विद रोड और जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्यों को विशेषज्ञ के साथ ना किया गया तो आने वाले समय में जोशीमठ धंस जाएगा वैज्ञानिकों ने स्थानीय लोगों के अनुरोध पर सर्वे किया रिपोर्ट दी थी सर्वेक्षण में वैज्ञानिकों ने पाया था की जोशीमठ के आसपास के इलाकों में तेजी से शहरीकरण बढ़ाने के साथ ही निर्माण कार्य हो रहे हैं के बाद यहां पहले से काफी भूगर्भीय हलचल है ऊपर से चार धाम यात्रा मार्ग पर निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है वैज्ञानिकों ने कहा था की ऑल वेदर रोड में हैलांग और मारवाड़ी के बीच के 20 किलोमीटर हिस्से में तेजी से कम हो रहा है लेकिन मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा यहां चार धाम सड़क का निर्माण विशेष उपचार के बाद ही होना चाहिए रिपोर्ट में यह भी कहा गया था की विष्णु घाट जल विद्युत परियोजना भी इस इलाके को खतरा है वैज्ञानिकों की टीम ने कहा था की कई जगह पर काफी सख्त पत्थर हैं जिन्हें गलत तरीके से तोड़कर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं अगर यहां विशेष ध्यान देते हुए नियंत्रित निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले समय में जो सिमर धीरे-धीरे धसने लगेगा क्या सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी प्रधानमंत्री रिकॉर्ड बनाने के लिए उत्तराखंड का दौरा करते हैं मगर इतनी बड़ी बात उन्हें नहीं पता होती है यह कैसे संभव हो सकता है मालूम तो था मगर सरकार ने इस पर जरा भी ध्यान नहीं दिया क्योंकि अगर समय रहते इस मामले को गंभीरता से लिया जाता और सब कुछ सही तरीके से होता तो अभी यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं बनता उसको लेकर चैनलों में न्यूज़ नहीं चलते ना मुख्यमंत्री के दौरे होते और ना ही पीएमओ की हाई लेवल मीटिंग और अगर ऐसा नहीं होता तो आपको पता नहीं चलता की सरकारें कम भी करती हैं जो सिमट से भारत तिब्बत सीमा महोत्सव किलोमीटर की दूरी पर है भूत हंसाओ का क्षेत्र सैन्य क्षेत्र और आईटीबीपी के मुख्यालय की ओर बढ़ाना शुरू हो गया है सैन्य क्षेत्र में जाने वाले सड़क भी dhashini शुरू हो गई है जो सिमट में भारतीय सी का ब्रिगेड मुख्यालय और भारत तिब्बत सीमा पुलिस की 1 बटालियन तैनात है जोशीमठ भारत तिब्बत सीमा का अंतिम शहर है यहां से नीति और मानव घटिया
मुश्किल हो जाएगा वैज्ञानिकों का कहना है की इस स्थिति में देश की सुरक्षा है खतरा पैदा हो सकता है अब सोचिए जरा सोचिए की सरकार को किसकी चिंता है