कहानी एक ऐसे जहाज की जो चला तो था बांग्लादेश के लिए लेकिन पहुंच गया भारत। मगर ऐसा कैसे हो गया? बताएंगे पुरी कहानी बने रहिए हमारे साथ।
तो चलिए पुरी खबर आपको बताते हैं। दरअसल हुआ यूं कि उर्सा मेज़र नाम का एक रूसी जहाज 14 नवंबर को सेंट पीटर्सबर्ग से बांग्लादेश के लिए चला था। उर्सा मेज़र अंतरीक्ष में तारों का एक समूह है, जिसमें करीब 50 तारे हैं। आपने आसमान में सात तारों के इस समूह को देखा होगा। यह ऊर्जा मेज़र का ही हिस्सा है। भारत में इन सात तारों के समूह को सप्त ऋषि के नाम से जाना जाता है। तो इसी ऊर्सा मेजर के नाम पर रूसी जहाज का नाम भी उर्सा मेजर रखा गया। एक बहुत ही रोचक बात है कि जब उर्सा मेजर के तारों को लाइंस द्वारा आपस में मिलाया जाता है तो एक बड़े भालू की तरह दिखता है। और साइबेरिया जो की रूस में है भालू के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए रूस ने अपने इस जायंट शिप का नाम उर्स मेजर रखा। 14 नवंबर को जब रूस का यह जहाज बांग्लादेश के लिए चला तो इसमें बांग्लादेश के रूपपूर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए उपकरण लादे गए थे। यह जहाज अपनी मंजिल की ओर बढ़ ही रहा था कि तभी दिसंबर महीने में ढाका में अमेरिकी दूतावास ने बांग्लादेश सरकार को बताया कि यह रूसी जहाज जिसमें बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए उपकरण ले जा रहे हैं, यह जहाज पहले स्पार्टा-3 नाम से था। जिसे अमेरिका ने प्रतिबंधित किया हुआ है। लेकिन रूस द्वारा इसका नाम बदलकर उर्सा मेजर कर दिया गया और यह अब इसी नाम से अपना ऑपरेशन चला रहा है। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि इस जहाज को बांग्लादेश में घुसने देना अमेरिकी प्रतिबंध का उल्लंघन होगा। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने फैसला किया की उर्स मेजर को बांग्लादेश में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। और इस फैसले के बारे में बांग्लादेश में रूस के राजदूत मॉन्तीस्की को भी जानकारी दे दी गई। इसके बाद इस रूसी जहाज को बंगाल की खड़ी की ओर मोड़ दिया गया। इस रूसी कार्गो शिप को बांग्लादेश के पोर्ट पर पहुंचना था, लेकिन अब यह भारत के हल्दिया पोर्ट पर आ चुका है। पता चला है कि हल्दिया में कार्गो उतारने के बाद सारा समान सड़क मार्ग के जरिए बांग्लादेश पहुंचा जा रहा है। दरअसल अमेरिका के आपत्ति के बाद बांग्लादेश ने इस रूसी जहाज को अपने बंदरगाह पर उतरने नहीं दिया, लेकिन भारत रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मान रहा। लिहाज बांग्लादेश ने अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट का समान बनाने के लिए भारत के हल्दिया पोर्ट का इस्तेमाल किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका की ओर से प्रतिबंधित किसी भी रूसी जहाज के किसी भी भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। इस बीच बांग्लादेश के शिपिंग मिनिस्टर खालिद महमूद चौधरी ने भारतीय राजदूत से बातचीत के बाद पत्रकारों से कहा कि रूपपूर प्रोजेक्ट सरकार के प्राथमिकता रही है। उन्होंने यह भी कहा की उन्हें पता नहीं था की जिस रूसी जहाज से इस प्रोजेक्ट का समान आ रहा है वह अमेरिकी प्रतिबंध के दायरे में आता है। लेकिन जब यह पता चल चुका है तो इस पर कार्यवाही की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया था की क्या कदम उठा जाएंगे। लेकिन अब जब यह जहाज भारत पहुंच चुका है तो सारी बातें साफ हो गई हैं। साफ है की बांग्लादेश ने यह कदम राजनैक स्थिति से बचने के लिए लिए हैं, मगर अब सवाल यह उठाता है की अमेरिका ने दूसरी जहाज पर प्रतिबंध क्यों लगाया दरअसल उर्स मेजर नाम का यह जहाज जो की पहले स्पार्टा 3 नाम से जाना जाता था।
इसका इस्दौतेमाल सीरिया युद्राध के दौरान सैन्य गतिविधियों के लिए किया गया था। उसी समय अमेरिका ने स्पार्टा-3 को प्रतिबंधित कर दिया था। मगर बाद में रूस ने उस जहाज का नाम बदलकर उर्सा मेजर रख दिया। हालांकि अमेरिका इसे अभी भी स्पार्टा-3 ही मानता है।